नाग पंचमी 2026: जानें सही तारीख, शुभ पूजा मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व
सनातन धर्म में नाग पंचमी का पर्व विशेष महत्व रखता है। यह दिन नाग देवता और भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार भारत के साथ-साथ नेपाल में भी बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है।
नाग पंचमी 2026 कब है? जानें सही तारीख
इस साल नाग पंचमी 17 अगस्त 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। यह पर्व उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु सहित देश के अधिकांश हिस्सों में इसी तारीख को मनाया जाएगा।
नाग पंचमी 2026 पूजा मुहूर्त और तिथि का समय
पंचमी तिथि प्रारंभ और समाप्ति का समय
हिंदू पंचांग के अनुसार पंचमी तिथि 16 अगस्त 2026 को शाम करीब 4:52 बजे से शुरू होगी और 17 अगस्त 2026 को शाम 5:00 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार यह पर्व 17 अगस्त को ही मनाया जाएगा।
नाग पंचमी 2026 पूजा मुहूर्त:
- शुभ मुहूर्त: सुबह 6:04 बजे से 8:39 बजे तक
- कुल अवधि: लगभग 2 घंटे 35 मिनट
पूजा के लिए यह समय सबसे शुभ माना गया है, इसलिए भक्तों को इसी दौरान पूजन कार्य पूरा करने की सलाह दी जाती है।
नाग पंचमी पूजा विधि — कैसे करें नाग देवता की पूजा
नाग पंचमी की पूजा विधि सरल लेकिन श्रद्धा से भरी होती है। इसे इस तरह किया जा सकता है:
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- घर के मुख्य द्वार या पूजा स्थान पर गोबर या मिट्टी से नाग देवता की प्रतीकात्मक आकृति बनाएं।
- नाग देवता को दूध, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें।
- दीपक और अगरबत्ती जलाकर विधिवत पूजा-अर्चना करें।
- आरती करें और नाग पंचमी की कथा सुनें या पढ़ें।
- पूर्ण श्रद्धा और भक्ति भाव से पूजा संपन्न करें, ऐसा माना जाता है कि इससे नाग देवता प्रसन्न होते हैं।
कई स्थानों पर लोग घरों की दीवारों और दरवाजों पर हल्दी, चंदन या गोबर से सांप की आकृति बनाकर उसकी पूजा भी करते हैं, जिसे सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है।
नाग पंचमी का धार्मिक महत्व और पौराणिक कथा
नाग पंचमी के पीछे कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं।
भगवान शिव और वासुकी नाग की कथा
भगवान शिव अपने गले में वासुकी नाग धारण करते हैं, जो भय, मृत्यु और जीवन के चक्रों पर नियंत्रण का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से शिव पूजा के साथ-साथ नाग पंचमी पर वासुकी नाग की भी विशेष पूजा की जाती है।
श्रीकृष्ण और कालिया नाग की कहानी
एक अन्य प्रसिद्ध कथा भगवान श्रीकृष्ण और कालिया नाग से जुड़ी है। कहा जाता है कि श्रीकृष्ण ने सावन मास में इसी दिन कालिया नाग का दमन कर गोकुलवासियों की रक्षा की थी। तभी से यह दिन नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है।
काल सर्प दोष से मुक्ति के उपाय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में काल सर्प दोष होता है, उनके लिए नाग पंचमी के दिन विधिपूर्वक पूजा करना विशेष लाभकारी माना जाता है। इससे दोष के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है, ऐसी मान्यता है।
मुख्य बिंदु:
- नाग पंचमी 2026 में 17 अगस्त सोमवार को मनाई जाएगी
- पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:04 से 8:39 बजे तक रहेगा
- यह पर्व भगवान शिव और नाग देवता की पूजा के लिए समर्पित है
- श्रीकृष्ण और कालिया नाग की कथा इस पर्व से जुड़ी है
- गुजरात में यह पर्व करीब एक महीने बाद अलग तारीख पर मनाया जाता है
नाग पंचमी व्रत नियम और खान-पान
नाग पंचमी के दिन कई भक्त व्रत भी रखते हैं। व्रत सूर्योदय से शुरू होकर सूर्यास्त तक चलता है। इस दौरान:
- खीर और साबूदाना या समा चावल की खिचड़ी बनाकर नाग देवता को भोग लगाया जाता है।
- व्रत खोलने के बाद यही प्रसाद ग्रहण किया जाता है।
- इस दिन तला-भुना और अधिक नमकीन भोजन करने से परहेज किया जाता है।
- कुछ भक्त एक दिन पहले से ही व्रत का संकल्प लेकर सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं।
गुजरात में अलग तारीख पर क्यों मनाई जाती है नाग पंचमी?
गुजरात में हिंदू पंचांग की अमांत (Amanta) प्रणाली का पालन किया जाता है, जिसके कारण वहां नाग पंचमी बाकी राज्यों से लगभग 15 दिन बाद मनाई जाती है। इस साल गुजरात में यह पर्व करीब 1 सितंबर 2026 के आसपास मनाया जाएगा। गुजरात में इसे “नाग पंचम” के नाम से भी जाना जाता है और यह जन्माष्टमी से तीन दिन पहले मनाया जाता है।
पाठकों पर असर
नाग पंचमी जैसे पर्व न केवल धार्मिक आस्था से जुड़े हैं, बल्कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान का संदेश भी देते हैं। सांपों को कई क्षेत्रों में खजाने और गुप्त ज्ञान के रक्षक के रूप में देखा जाता है, इसलिए यह पर्व मनुष्य और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने की सीख भी देता है। सही तारीख और मुहूर्त की जानकारी होने से श्रद्धालु पूजा-अर्चना को सही समय पर पूरे विधि-विधान से कर सकते हैं।
निष्कर्ष
नाग पंचमी 2026 का पर्व 17 अगस्त सोमवार को श्रावण मास की शुक्ल पंचमी तिथि पर मनाया जाएगा। यह दिन भगवान शिव, नाग देवता और सर्प शक्ति की उपासना का प्रतीक है। सही मुहूर्त और पूजा विधि का पालन करके श्रद्धालु इस पावन दिन को पूर्ण श्रद्धा के साथ मना सकते हैं और नाग देवता का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।