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Kusha Missile परीक्षण के दौरान लॉन्च होती भारत की स्वदेशी लॉन्ग-रेंज मिसाइल
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भारत का Kusha Missile सफल परीक्षण, जानें इसकी ताकत

By Anshum Raj
July 24, 2026 5 Min Read
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भारत का Kusha Missile सफल परीक्षण, जानें इसकी ताकत

भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करते हुए एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 23 जुलाई 2026 को ओडिशा तट स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से स्वदेशी रूप से विकसित Kusha लॉन्ग-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (LR-SAM) का पहला फ्लाइट टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा किया। यह परीक्षण भारत के एयर डिफेंस सिस्टम के क्षेत्र में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

क्या है Kusha Missile? जानें पूरी जानकारी

Kusha Missile, जिसे Project Kusha या Extended Range Air Defence System (ERADS) के नाम से भी जाना जाता है, एक लॉन्ग-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम है। इसे DRDO की प्रयोगशालाओं और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (Bharat Electronics) जैसे उद्योग भागीदारों ने मिलकर विकसित किया है। इस सिस्टम में मिसाइल, रडार और कमांड-कंट्रोल सेंटर — सभी हिस्से पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार किए गए हैं।

इस मिसाइल सिस्टम को खासतौर पर लड़ाकू विमानों, दुश्मन की मिसाइलों, ड्रोन और बड़े सैन्य विमानों जैसे हवाई खतरों को हवा में ही नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

Kusha Missile Test कैसे हुआ सफल?

23 जुलाई को हुए इस परीक्षण में मिसाइल सिस्टम ने एक ऐसे इलेक्ट्रॉनिक टारगेट को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया, जो तेज़ रफ्तार और ऊंचाई पर उड़ने वाले हवाई खतरे जैसी स्थिति को दर्शा रहा था। यह परीक्षण एक साथ काम करने वाली कई DRDO प्रयोगशालाओं, रडार डेवलपर्स और निजी उद्योग भागीदारों के वर्षों के काम का नतीजा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बयान

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस परीक्षण को भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास के लिए एक अहम उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि लॉन्ग-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल बनाने की क्षमता अभी तक दुनिया के गिने-चुने तकनीकी रूप से उन्नत देशों के पास ही थी, और अब भारत भी इस सूची में शामिल हो गया है। रक्षा सचिव और DRDO चेयरमैन राजेश कुमार सिंह ने पूरे परीक्षण की निगरानी की।

Kusha Missile की ताकत और खासियतें

Kusha Missile सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक साथ कई तरह के हवाई खतरों को बेअसर कर सकता है।

  • लड़ाकू विमानों को मार गिराने की क्षमता
  • दुश्मन की मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करना
  • ड्रोन और मानवरहित हवाई वाहनों को इंटरसेप्ट करना
  • बड़े सैन्य विमानों को निशाना बनाना
  • लगभग 400 किलोमीटर तक की रेंज में हवाई खतरों को भेदने की क्षमता

Kusha Missile की रेंज और स्पीड

रिपोर्ट्स के मुताबिक, Project Kusha के तहत तीन तरह के मिसाइल वैरिएंट तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी रेंज अलग-अलग है:

  • M1 वैरिएंट: करीब 120–150 किलोमीटर
  • M2 वैरिएंट: करीब 250 किलोमीटर
  • M3 वैरिएंट: करीब 350–400 किलोमीटर

यह मिसाइल सिस्टम अधिकतम मैक 5.5 (ध्वनि की गति से करीब साढ़े पांच गुना) तक की रफ्तार से लक्ष्य की ओर बढ़ सकता है।

हिट-टू-किल तकनीक क्या है

Kusha Missile में हिट-टू-किल (Hit-to-Kill) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, यानी मिसाइल सीधे लक्ष्य से टकराकर उसे नष्ट करती है, न कि सिर्फ उसके पास फटकर। इसके साथ ही इसमें ऑप्टिकल प्रॉक्सिमिटी फ्यूज और हाइब्रिड RF/IR गाइडेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है, जो इसे बेहद सटीक बनाता है।

S-400 और Kusha Missile में क्या है अंतर?

भारत पहले से ही रूस निर्मित S-400 एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है। जून 2026 में इसकी चौथी स्क्वाड्रन समुद्री रास्ते से भारत पहुंची थी, और मार्च 2026 में पांच अतिरिक्त स्क्वाड्रन को मंजूरी भी दी जा चुकी है। ऐसे में सवाल उठता है कि Kusha Missile की जरूरत क्यों पड़ी?

दरअसल, भारत एक तरफ आयातित S-400 सिस्टम का विस्तार कर रहा है, तो दूसरी तरफ स्वदेशी Kusha सिस्टम को भी साथ-साथ विकसित कर रहा है। इसका मकसद है कि भारत की एयर डिफेंस क्षमता किसी एक देश या सिस्टम पर पूरी तरह निर्भर न रहे, और आयात पर निर्भरता धीरे-धीरे कम हो।

भारत की एयर डिफेंस क्षमता पर क्या होगा असर?

Kusha Missile का सफल परीक्षण भारत की मल्टी-लेयर्ड एयर डिफेंस शील्ड को और मजबूत करेगा। इसका मतलब है कि भारत की सीमाओं और महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा अलग-अलग रेंज और ऊंचाई पर काम करने वाले कई मिसाइल सिस्टम की परतों से होगी।

स्वदेशी तकनीक से आत्मरक्षा में मजबूती

चूंकि Kusha Missile के सभी हिस्से — मिसाइल, रडार और कमांड-कंट्रोल सिस्टम — भारत में ही बनाए गए हैं, इसलिए इससे विदेशी सिस्टम पर निर्भरता घटेगी। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है, खासकर तब जब वैश्विक स्तर पर हथियार आपूर्ति और डिलीवरी में देरी जैसी चुनौतियां सामने आती रहती हैं।

आगे क्या है योजना?

यह Kusha Missile सिस्टम का पहला फ्लाइट टेस्ट था। रिपोर्ट्स के अनुसार, आने वाले समय में इसके अन्य वैरिएंट (M2 और M3) के भी परीक्षण किए जाने की योजना है, और इस पूरे सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से भारतीय वायुसेना और नौसेना में शामिल किया जाएगा। हालांकि पूर्ण रूप से सेवा में आने में अभी कुछ समय लग सकता है, क्योंकि इससे पहले कई और परीक्षण और मूल्यांकन प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी।

आम पाठकों के लिए इसका क्या मतलब है

आम नागरिकों के लिए यह खबर सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी है। एक मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम का मतलब है सीमाओं की बेहतर सुरक्षा, जिससे देश की समग्र सुरक्षा और रणनीतिक स्थिति दोनों मजबूत होती हैं।

निष्कर्ष

Kusha Missile का सफल परीक्षण भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह न सिर्फ भारत की स्वदेशी तकनीकी क्षमता को दिखाता है, बल्कि आने वाले वर्षों में देश को आयातित हथियार प्रणालियों पर निर्भरता कम करने में भी मदद करेगा। आने वाले समय में इस मिसाइल सिस्टम के और परीक्षण और इसके सेना में शामिल होने की खबरों पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।

(Trusted Official Sources)

  1. DRDO आधिकारिक वेबसाइट — drdo.gov.in
  2. रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार — mod.gov.in
  3. Press Information Bureau (PIB) — pib.gov.in

FAQs

Q1. Kusha Missile की रेंज कितनी है? Kusha Missile सिस्टम के अलग-अलग वैरिएंट की रेंज 120 किलोमीटर से लेकर करीब 400 किलोमीटर तक बताई जा रही है।

Q2. Kusha Missile कब तक पूरी तरह सेना में शामिल होगी? रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से आने वाले वर्षों में सेना में शामिल किया जाना है, हालांकि इसके लिए अभी और परीक्षण होने बाकी हैं।

Q3. Kusha Missile S-400 से किस तरह अलग है? S-400 रूस से आयातित सिस्टम है, जबकि Kusha Missile पूरी तरह भारत में स्वदेशी रूप से विकसित की गई है। दोनों सिस्टम भारत की एयर डिफेंस क्षमता को अलग-अलग स्तर पर मजबूत करते हैं।

Q4. Kusha Missile किसने विकसित की है? Kusha Missile को DRDO की विभिन्न प्रयोगशालाओं ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड जैसे उद्योग भागीदारों के साथ मिलकर विकसित किया है।

Q5. Kusha Missile का पहला परीक्षण कहां हुआ? Kusha Missile का पहला फ्लाइट टेस्ट 23 जुलाई 2026 को ओडिशा तट स्थित एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया।

Tags:

DRDOIndian Air ForceKusha MissileS-400
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Anshum Raj

Anshum Raj is the Founder and Content Writer of newstv27.com, a digital news platform dedicated to delivering timely, accurate, and engaging coverage to its readers. With a strong passion for journalism and storytelling, Anshum established newstv27.com with a clear vision: to create a reliable source of news that keeps readers informed on the issues that matter most. As both founder and content writer, he oversees the platform's editorial direction while personally researching, writing, and publishing content across a range of topics. Anshum believes in the power of clear, honest reporting and is committed to maintaining journalistic integrity in every piece published on the platform. His hands-on approach — combining leadership with day-to-day writing — reflects his dedication to building newstv27.com into a trusted name in digital media. Under his guidance, newstv27.com continues to grow as a go-to destination for news, striving to combine speed, accuracy, and readability in every story it publishes.

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