लोकसभा में Public Examinations Amendment Bill 2026 पास, जानें नया कानून
देश भर के लाखों छात्रों और प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। बुधवार, 29 जुलाई 2026 को लोकसभा ने Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। यह बिल पेपर लीक और परीक्षा में नकल जैसी घटनाओं पर लगाम कसने के लिए लाया गया है, और इसमें सजा तथा जुर्माने के प्रावधानों को पहले से कहीं ज्यादा सख्त बना दिया गया है।
पिछले कुछ वर्षों में देश में कई बड़ी सरकारी परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाएं सामने आई थीं, जिनकी वजह से लाखों छात्रों की मेहनत पर पानी फिर गया था। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 2024 में बने कानून को और मजबूत करने के लिए यह संशोधन बिल संसद में पेश किया।
Public Examinations Amendment Bill 2026 क्या है?
यह बिल असल में Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 में संशोधन करने के लिए लाया गया है। 2024 का मूल कानून 21 जून 2024 से लागू हुआ था और इसका मकसद सरकारी भर्ती परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों को रोकना था।
केंद्रीय राज्य मंत्री (कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 27 जुलाई 2026 को यह संशोधन बिल लोकसभा में पेश किया था। उन्होंने कहा कि यह बिल तेज जांच, विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के जरिए तेज सुनवाई, विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति और अपीलों के समयबद्ध निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है।
लोकसभा में कब और कैसे पास हुआ बिल?
यह बिल 27 जुलाई 2026 को लोकसभा में पेश हुआ था और दो दिन बाद, 29 जुलाई 2026 को इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। बिल पर चर्चा के दौरान संसद में विपक्ष का हंगामा भी देखने को मिला।
विपक्षी सदस्य हाल ही में NEET से जुड़े छात्र प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई पर चर्चा की मांग कर रहे थे, जिसकी वजह से सदन की कार्यवाही में बाधा भी आई। इसके बावजूद सरकार बिल को पारित कराने में सफल रही।
बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि सिर्फ सख्त सजा काफी नहीं है, बल्कि पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस निवारक (preventive) उपायों की भी जरूरत है।
नए कानून में सजा और जुर्माने में क्या बदलाव हुआ?
यह संशोधन बिल पुराने कानून के मुकाबले सजा और जुर्माने दोनों में भारी बढ़ोतरी करता है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
व्यक्तिगत आरोपियों के लिए सजा में बदलाव
- पहले: नकल करने पर 3 से 5 साल तक की कैद और अधिकतम ₹10 लाख जुर्माना
- अब: 5 से 10 साल तक की कैद और अधिकतम ₹50 लाख जुर्माना
सेवा प्रदाताओं (Service Providers) पर सख्ती
- सेवा प्रदाताओं के लिए अधिकतम जुर्माना ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ किया गया है
- परीक्षा संचालन से डिबार (प्रतिबंधित) करने की अवधि 4 साल से बढ़ाकर 8 साल कर दी गई है
- सेवा प्रदाता कंपनियों के प्रबंधकीय कर्मचारियों (managerial personnel) को भी अब 5 से 10 साल तक की सजा और ₹5 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान है
संगठित अपराध पर विशेष प्रावधान
अगर परीक्षा में गड़बड़ी किसी संगठित गिरोह द्वारा की जाती है, तो सजा और भी सख्त होगी:
- न्यूनतम सजा 5 साल से बढ़ाकर 7 साल की गई है, जो 10 साल तक बढ़ सकती है
- अधिकतम जुर्माना ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ कर दिया गया है
Special Fast Track Court और जांच की नई समय-सीमा
छात्रों के लिए एक और अहम बदलाव यह है कि अब परीक्षा से जुड़े मामलों की जांच और सुनवाई तेजी से होगी, ताकि पीड़ित अभ्यर्थियों को जल्दी न्याय मिल सके।
धारा 12A: दो महीने में जांच पूरी
बिल में नई धारा 12A जोड़ी गई है, जिसके तहत:
- किसी भी मामले की जांच 2 महीने के भीतर पूरी करनी होगी
- सेशन कोर्ट को Special Fast Track Court के रूप में नामित किया जाएगा, जहां रोज सुनवाई होगी
- चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा करना होगा
- हर फास्ट ट्रैक कोर्ट के लिए विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) नियुक्त किया जाएगा
धारा 12B: हाईकोर्ट में अपील की समय-सीमा
नई धारा 12B के अनुसार, फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील 30 दिन के भीतर हाईकोर्ट में की जा सकेगी, और जहां तक संभव हो, इसका निपटारा 3 महीने के भीतर किया जाएगा।
इसके अलावा, केंद्र सरकार को यह अधिकार भी दिया गया है कि वह जरूरत पड़ने पर परीक्षा से जुड़े अपराधों की जांच एक विशेष टास्क फोर्स (Special Task Force) को सौंप सके।
यह कानून किन परीक्षाओं पर होगा लागू?
Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 और इसका यह संशोधन बिल निम्नलिखित संस्थाओं द्वारा आयोजित परीक्षाओं पर लागू होता है:
- संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)
- कर्मचारी चयन आयोग (SSC)
- रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB)
- बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (IBPS)
- राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA)
- केंद्र सरकार के मंत्रालय और उनके अधीनस्थ कार्यालय
- केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य प्राधिकरण
इस कानून के तहत सभी अपराध संज्ञेय (cognizable), गैर-जमानती (non-bailable) और गैर-समझौता योग्य (non-compoundable) माने गए हैं, जिनमें कैद, जुर्माना और संपत्ति कुर्क करने जैसे कड़े प्रावधान शामिल हैं।
छात्रों और अभ्यर्थियों के लिए क्या मायने रखता है यह बिल?
यह संशोधन बिल उन लाखों छात्रों के लिए सीधा असर डालने वाला है, जो हर साल UPSC, SSC, रेलवे, बैंकिंग और अन्य सरकारी भर्ती परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। इसके प्रमुख फायदे इस प्रकार हो सकते हैं:
- पेपर लीक करने वालों को अब पहले से कहीं ज्यादा सख्त सजा का सामना करना पड़ेगा, जिससे ऐसी घटनाओं पर लगाम लगने की उम्मीद है
- तेज जांच और फास्ट ट्रैक कोर्ट की वजह से मामलों का निपटारा जल्दी होगा, जिससे परीक्षा दोबारा कराने या नतीजे में देरी होने की संभावना कम हो सकती है
- सेवा प्रदाता कंपनियों पर भारी जुर्माना और लंबी डिबारमेंट अवधि से परीक्षा एजेंसियां अधिक जिम्मेदारी से काम करने के लिए बाध्य होंगी
- संगठित गिरोहों के खिलाफ सख्त प्रावधान से बड़े पैमाने पर होने वाली धांधली पर अंकुश लगने की उम्मीद है
गौरतलब है कि इस साल मई 2026 में NEET परीक्षा को रद्द कर अगले महीने दोबारा आयोजित किया गया था, जिसके बाद परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठे थे। यह संशोधन बिल उसी पृष्ठभूमि में लाया गया माना जा रहा है।
पृष्ठभूमि: 2024 का मूल कानून
मूल Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 को 6 फरवरी 2024 को लोकसभा और 9 फरवरी 2024 को राज्यसभा से मंजूरी मिली थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 25 फरवरी 2024 को इसे मंजूरी दी थी, और यह 21 जून 2024 से प्रभावी हुआ था।
इस कानून का उद्देश्य देशभर में होने वाली सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना था। लेकिन बीते दो वर्षों में सामने आई पेपर लीक की घटनाओं ने इस कानून को और मजबूत करने की जरूरत को उजागर किया, जिसके परिणामस्वरूप यह 2026 का संशोधन बिल लाया गया।
निष्कर्ष
Public Examinations Amendment Bill 2026 का लोकसभा में पारित होना छात्रों और अभ्यर्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सख्त सजा, भारी जुर्माना और तेज न्यायिक प्रक्रिया के जरिए सरकार परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करने की कोशिश कर रही है। अब यह बिल राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहां से पारित होने के बाद यह कानून का रूप लेगा। छात्रों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि यह कानून असल में जमीनी स्तर पर पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने में कितना कारगर साबित होता है।
External Linking Suggestions
- Press Information Bureau (PIB) – pib.gov.in
- PRS Legislative Research – prsindia.org
- Lok Sabha आधिकारिक वेबसाइट – loksabha.nic.in
- UPSC आधिकारिक वेबसाइट – upsc.gov.in
- National Testing Agency – nta.ac.in
FAQs
प्रश्न 1: Public Examinations Amendment Bill 2026 क्या है? उत्तर: यह Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 में संशोधन के लिए लाया गया बिल है, जो पेपर लीक और परीक्षा में नकल पर सजा और जुर्माना बढ़ाता है।
प्रश्न 2: पेपर लीक करने पर अब कितनी सजा मिलेगी? उत्तर: नए कानून के तहत व्यक्तिगत आरोपियों को 5 से 10 साल तक की कैद और ₹50 लाख तक जुर्माना हो सकता है, जबकि संगठित अपराध में न्यूनतम 7 साल सजा का प्रावधान है।
प्रश्न 3: यह बिल किन परीक्षाओं पर लागू होता है? उत्तर: यह UPSC, SSC, रेलवे भर्ती बोर्ड, IBPS, NTA और केंद्र सरकार के मंत्रालयों द्वारा आयोजित परीक्षाओं पर लागू होता है।
प्रश्न 4: Public Examinations Amendment Bill 2026 लोकसभा में कब पास हुआ? उत्तर: यह बिल 29 जुलाई 2026 को लोकसभा में ध्वनिमत से पारित किया गया।
प्रश्न 5: इस कानून से छात्रों को क्या फायदा होगा? उत्तर: तेज जांच, फास्ट ट्रैक कोर्ट में जल्दी सुनवाई और सख्त सजा से पेपर लीक की घटनाओं में कमी आने और मामलों के जल्दी निपटारे की उम्मीद है।