अमेरिका ईरान हमला: जॉर्डन बेस अटैक के बाद अमेरिका ने ईरान पर की जवाबी सैन्य कार्रवाई, पश्चिम एशिया में युद्ध फिर तेज
पश्चिम एशिया एक बार फिर युद्ध की आग में झुलस रहा है। अमेरिका ने गुरुवार को ईरान पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमले किए हैं। यह कार्रवाई ईरान द्वारा बुधवार को जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए हमले के जवाब में की गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इसे “शक्तिशाली जवाबी कार्रवाई” बताया है।
अमेरिका ईरान हमले की पूरी टाइमलाइन
करीब एक हफ्ते की सापेक्षिक शांति के बाद दोनों पक्षों ने बीते 24 घंटों में एक-दूसरे पर सैन्य हमले किए हैं, जिससे पूर्ण युद्ध की आशंका फिर गहरा गई है। स्थिति यह है कि फिलहाल न तो अमेरिका और न ही ईरान की तरफ से आगे की रणनीति को लेकर कोई स्पष्टता सामने आई है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का बयान
CENTCOM के अनुसार, अमेरिका ने दो घंटे से अधिक समय तक चली कार्रवाई में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर से जुड़े दर्जनों ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें सैन्य कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन सुविधाएं, तथा तटीय निगरानी और रक्षा प्रणालियां शामिल थीं।
जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर ईरान का हमला कैसे हुआ?
यह पूरा घटनाक्रम बुधवार को उस समय शुरू हुआ जब ईरान ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया। जॉर्डन की सेना ने बताया कि उसने ईरान से दागी गई पांच मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया, जिसमें किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की प्रतिक्रिया
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उन्होंने जॉर्डन स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया था। इसके जवाब में अमेरिका ने अपनी सैन्य कार्रवाई तेज करते हुए ईरान के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर हमले किए।
होर्मुज जलडमरूमध्य में क्यों बढ़ा तनाव?
पश्चिम एशिया युद्ध के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य एक बड़ा तनाव बिंदु बना हुआ है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
तेल टैंकरों की सुरक्षा पर खतरा
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के अनुसार, अमेरिकी समर्थन से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहे दो तेल टैंकरों को वापस लौटना पड़ा, जब उनमें से एक में आग लग गई। ईरान ने फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखा है और यह रुख अपनाया है कि जहाजों को इस जलमार्ग से गुजरने के लिए ईरान की अनुमति और शुल्क अदायगी जरूरी है।
हालांकि, कतर एनर्जी की एक एलएनजी टैंकर 29 जुलाई की रात को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित बाहर निकल गई, जो 11 जुलाई के बाद पहली ऐसी घटना है।
सऊदी अरब की एंट्री और डोनाल्ड ट्रंप का बयान
इस संघर्ष में एक नया मोड़ तब आया जब सऊदी अरब ने भी ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में खुलकर हिस्सा लिया। अमेरिका और सऊदी अरब ने मिलकर इराक में ईरान समर्थित लड़ाकों पर हमला किया, जिसमें कम से कम 20 लड़ाके और 6 ईरानी सलाहकार मारे गए।
कूटनीतिक बातचीत क्यों रुकी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जॉर्डन बेस पर हमले के बाद सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान को “बहुत कड़ा जवाब” दिया जाएगा। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि ईरान माफी मांग चुका है, लेकिन अब भी उसे सबक सिखाना जरूरी है। दूसरी तरफ ईरान के उप विदेश मंत्री ने साफ किया कि पिछले दो हफ्तों से अधिक समय से उनकी तरफ से बातचीत फिर शुरू करने का कोई अनुरोध नहीं भेजा गया है, जिससे कूटनीतिक रास्ता फिलहाल बंद नजर आ रहा है।
ईरान के केशम आइलैंड पर हमले में नुकसान
अमेरिकी हमलों का सबसे दुखद पहलू ईरान के केशम द्वीप पर सामने आया। ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, केशम द्वीप के एक रिहायशी इलाके में हुए हमले में एक परिवार के तीन सदस्यों — पिता, मां और उनके 2 साल के बच्चे — की मौत हो गई, जबकि दो अन्य बच्चे घायल हुए हैं। इसके अलावा खुज़ेस्तान प्रांत में भी धमाकों की खबर है।
मुख्य बिंदु:
- अमेरिका ने ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर से जुड़े दर्जनों ठिकानों पर हमला किया
- जॉर्डन ने ईरान की पांच मिसाइलों को हवा में मार गिराया
- होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की आवाजाही पर खतरा बरकरार
- सऊदी अरब ने भी ईरान समर्थित मिलिशिया के खिलाफ कार्रवाई में हिस्सा लिया
- केशम द्वीप पर अमेरिकी हमले में एक परिवार के तीन सदस्यों की मौत
पश्चिम एशिया युद्ध का वैश्विक असर
इस संघर्ष का असर सिर्फ ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहा।
मिस्र और इराक में भी फैला असर
मिस्र के भूमध्यसागरीय बंदरगाह दमिएटा में एक ड्रोन हमले से गैस भंडारण टैंकर में आग लग गई। ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा फर्म एम्ब्रे के अनुसार यह हमला अमेरिकी स्वामित्व वाली एक फ्लोटिंग स्टोरेज सुविधा और एक ग्रीक स्वामित्व वाले टैंकर पर हुआ, हालांकि इसकी जिम्मेदारी अभी स्पष्ट नहीं है। वहीं इज़राइल ने ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह पर संघर्ष विराम के उल्लंघन का आरोप लगाया है, जिससे संकेत मिलता है कि यह तनाव पूरे क्षेत्र में और फैल सकता है।
पाठकों पर असर
पश्चिम एशिया में जारी यह संघर्ष सीधे तौर पर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों, ऊर्जा आपूर्ति और भारत जैसे तेल आयातक देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाला तेल व्यापार बाधित होने पर भारत में भी पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
निष्कर्ष
अमेरिका और ईरान के बीच सप्ताहभर की सापेक्षिक शांति के बाद फिर से शुरू हुआ यह सैन्य टकराव पश्चिम एशिया को एक बड़े और व्यापक युद्ध की ओर धकेल सकता है। सऊदी अरब की सीधी भागीदारी और कूटनीतिक बातचीत के ठप पड़ने से आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर होने के आसार हैं। पूरी दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर लौटेंगे या यह संघर्ष पूर्ण युद्ध का रूप ले लेगा।